ना जाने क्यों मन उदास है
पता नहीं किसकी तलाश है
जकड़ रखा है किस एहसास ने
बेगाने से है हम अपने आप में
हुई कौन सी खता
बिलकुल भी नहीं पता
रोने को है दिल
पर आंसुओ का नहीं है पता
न जाने क्या मुझसे छूट रहा है
न जाने क्या है वो जो टूट रहा है
लगता है ऐसा सब रुक सा गया है
ये दुनिया ही शायद
मुझसे रूठ गया है
चाहत थी ऐसी
क्या बताऊ कैसी कैसी
अब तो उस चाहत ने भी अपना दामन खींच लिया है
न चाहते हुए भी
मेरा सब कुछ मुझसे छीन लिया है।
पता नहीं किसकी तलाश है
जकड़ रखा है किस एहसास ने
बेगाने से है हम अपने आप में
हुई कौन सी खता
बिलकुल भी नहीं पता
रोने को है दिल
पर आंसुओ का नहीं है पता
न जाने क्या मुझसे छूट रहा है
न जाने क्या है वो जो टूट रहा है
लगता है ऐसा सब रुक सा गया है
ये दुनिया ही शायद
मुझसे रूठ गया है
चाहत थी ऐसी
क्या बताऊ कैसी कैसी
अब तो उस चाहत ने भी अपना दामन खींच लिया है
न चाहते हुए भी
मेरा सब कुछ मुझसे छीन लिया है।
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