वक़्त का क्या है
आज है, कल खो जायेगा
आंसू ही तो है
आँखों से बहार आ जायेगा
अगर बिसर गयी कुछ पलके
न आएगा लौट कर वापस
क्यूंकि ये वक़्त है
आज है,कल कहीं खो जायेगा
जब आएगा गुदगुदाने
तब रुला कर जायेगा
जब आएगा तड़पने
तब खामोश कर जायेगा
क्यूंकि कुछ नहीं बस वक़्त है ये
न जाने किस पल ठहर जायेगा
न जाने किस काश्माकास में बैठा हुआ हूँ
न सुबह का पता ना शाम की खबर कोई
पता नहीं कैसी उलझनों में अटका पड़ा हूँ
शायद है ये वक़्त
जिस में मैं खो गया हूँ
न जाने किस अरमान से
घर से दूर निकल आया हूँ मैं
ज़िंदगी की जंग लड़ते लड़ते
अपनी ही खून में भीग आया हूँ मैं
कुछ इलम नहीं है मुझे की हुआ क्या है
बस ये पता है
वक़्त से कहीं दूर निकल आया हूँ मैं
ज़िंदा हूँ लेकिन लगता है ऐसा
वक़्त के हाथो मारा गया हूँ.मैं ||
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