बहुत दूर हो गए है किनारे,
हम तो बैठे देखते रह गए
न जाने कब खोये हम यादो में
जब होश आया तो खुद को पाया वीराने में
और हमने तो बड़े धूम से जशन मनाया था
खुद के अकेलेपन का
लेकिन न जाने कब हुए हम ऐसे बेपरवाह
अब तो अकेले में भी गुनगुना लेते है
सच कहते है हम
अब तो ऐसे ही मुस्कुरा लेते है हम
कभी जो अकेले में याद आ जाती है
बस एक बार दिल से पुकार लेते है हम
और फिर क्या
ऐसे ही अकेले में मुस्कुरा लेते है हम
एक वक़्त फकीरी का ऐसा भी था ज़िंदगी में
जब बेरोजगारी का मोहर लगा था दमन में
बहुत कमाते थे तब मेरे जानने वाले
लेकिन फकीरी में ही छोर गए मेरे चाहने वाले
लेकिन ये कहते थे मेरे वालिद
ग़म ना करना कभी भी किसी भी बात का
होगा, सुबह हर काली अँधेरी रात का
अब तो हर तरफ उजाला है
दामन भी साफ़ हमारा है
न ग़म है ना कोई काली रात
अब तो हर तरफ ख़ुशी है मुस्कुराहटो के साथ
मेरा तो कुछ वक़्त ही ऐसा था
जो भी छू देता उससे बर्बाद ही होना था
इसलिए, सब दोष ही मेरा था
और उसका सारा निष्कर्ष भी मेरा था
अब तो ये फ़क़ीर भी
चार रोटी कमा लेता है
रातो को सपने देखने का हिम्मत भी जुटा लेता है
इसलिए तो अब दिल खोल, सब कुछ भूल कर मुस्कुरा लेता है
देखा है सब को आपने हर दौर में
ख़ुशी है की सब खुश है
अब तो दुआ में भी सबकी ख़ुशी मांग लेता हूँ
इसलिए तो अब तुम्हरी वजह से मुस्कुरा लेता हूँ
thank you for coming in my life and now becoming the reason for my smile and yes the success as well.
thanks a lot..
god bless you and keep u and your dreams fulfilled and happy always....
😊😊😊😊😊😊😊
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