Tuesday, September 21, 2010

कहानी

जिंदगी के हर हाल में,
संभाला है तुमने
थके मेरे पैरो को,
सहलाया है तुमने
थक कर गया बैठ जब,
तब खुली हवा में उड़ाया है तुमने
दूर बैठी है तू
फिर भी दिल की धड़कन को सुना है तुमने
हर अँधेरे से
हाथ पकड़ उजाले में लाया है तुमने
मेरे खवाबो को
हकीकत बनाया है तुमने
मेरे जिंदगी से
बड़े होने का दर्द मिटाया है तुमने
दिया ही तो है सब
पर बताया नहीं कभी तुमने
आज तुझे में बतलाता हूँ
एक कहानी प्यारी है
उप्पर बैठे हम दोनों में
निचे आने की बारी थी
तू पहले नीचे आई
तब मैं वहां अकेला था
मेरे आँखों में आंसू थे
पर वो बस पल दो पल का खेला था
फिर मेरी भी बारी आई
पर धरती पर मैं अकेला था
समय बीता और पता चला
कहाँ पर तेरा डेरा था
उससके बाद तो साथ है बहना
और आगे क्या तुझसे कहना
रह गयी बात कहानी की
आज की ही दिन है जिंदगानी की
जब तू नीचे आई थी
आपना जन्मदिन मनाई थी
आज जो तुझको बात कहूँगा
कल भी मैंने वही कहा था जब मैं अकेला ऊपर था
Happy birthday to u diiiii
Many Many happy returns of the day

1 comment:

  1. कुछ स्पष्ट बात नहीं हो पाई...सिवाय इसके कि आपकी दीदी का जन्म दिन है...

    उन्हें हमारी तरफ से भी बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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