उपवन मेरे सोच का,
बिखरेगा एक दिन देखना,
प्रीत मेरे जीवन का
बिछङेगा एक दिन देखना
फिर भी मैं
खिजाओ के जाने का इंतज़ार करूँगा
जीवन में तुझे पाने का इंतज़ार करूँगा
रब से मैं तेरे लिए फरियाद करूँगा
और नही तो बस
जिंदगी भर तुझे याद करूँगा !
पर देखना है मुझे की
मेरी फरियादों में कितनी असर होती है
जिंदगी में हर पल तेरी कसक होती है
या साथ में तेरी जिंदगी की बसर होती है
जाना है मुझे दूर बहुत
तेरी आँखों से
फिर भी मैं
तेरे नाम का चिलमन जलाये रखूँगा
बिखरना कुछ दिनों का
दुःख तो देगा ही मुझे
पर पता है मुझको ये की
रह गए जो फूल सारे, तो बहारो में
सोच का उपवन वो मेरा
फिर खिलेगा देखना
रंग विरंग के फूल भी
उस में मिलेंगे देखना
उस दिन मैं कहूँगा
उपवन मेरे सोच का अब खिलेगा देखना..............
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