Saturday, August 29, 2009

हँसना अपनी जिंदगी पर
ज़रा मुस्किल सा लगता है
सवालो में घिरी एक जिंदगी जीने में बड़ा अजीब लगता है
क्यूँ किया ऐसा जो करना नही था
क्यूँ हुआ ऐसा जो होना नही था
क्यूँ मंजिलो से दूर रास्तो से लड़ पड़े
अब अकेले उन रास्तो पर चलने में भी डर लगता है
अपने हाथो से अपने आर्मानो को तोड़ कर
उनके टुकडो को जोरने से डर लगता है
खुली आसमा के नीचे सर छुपाने से डर लगता है
रातो को तारे के नीचे आसियान बनने से डर लगता है
अब कैसे कहूँ मैं की मुझे ख़ुद से ही डर लगता है
मिन्नतों से मिली खुशी को गले लगाने से डरता हूँ



1 comment:

  1. this is life .......issi ko fate kismat kahete hai

    ReplyDelete