लौट कर घर को देखा
तो वो एक समसान था
उस में फैली खुशिया
वीरान था.....
हर तरफ़ थी यादो की महफिल
सच्ची में वो एक खाक था
दिल की हर बस्ती जली है
न धुआ न खाक है
एक बेबसी हर वक्त है
आंसुओ से शुर्ख है
हर तरफ़ की दुनिया मेरी
खून के जगह पर
आंसू की धर है
मेरी नज़रो में तो हर पल आंसुओ की बौच्चार है
आपनी ही नज़रे चुराता
मैं एक दर्द हूँ
आपनी ही उमीदो से टूटता
आपनी बातो से मुकरता
आपनी आर्मानो से मैं लड़ता
आपनो को गमो के सौगात देता
मैं एक दर्द हूँ
बस दर्द हूँ...............
bahut hi achchi kavita Ravi........ kuch spelling mistakes hain ..........unhe thik kar lena........
ReplyDeleteWelcum.......
well mahfuz sir i write only for my sake whtever i hav written here is my feeling n its a reality of my life.....
ReplyDeleteaur waisse main naya hu to jada mere ko aata nahi hai isliye spelling mistakes hai bt sikh jaunga dheer dheer......